नोएडा में रहने वाली गूंज की वॉलंटियर नूपुर सहाय गूंज के कई कामों से जुड़ी रही हैं। चाहे वह गूंज के लिए कलेक्शन कैंप आयोजित करना हो या फिर काम के बारे में जागरूकता फैलाना हो।
2025 का रक्षाबंधन उनके लिए एक ऐसा ही मौका बन गया। यह दिन सिर्फ़ रस्मों या मिठाइयों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कुछ सोचने और कुछ करने की वजह बना। नूपुर ने तय किया कि वे इस बार बाज़ार से राखियाँ नहीं खरीदेंगी। उन्होंने खुद अपने हाथों से राखियाँ बनाईं, एक-एक धागा जोड़ते हुए, रंग चुनते हुए, गाँठ बाँधते हुए। हर राखी में उनका समय, धैर्य और एक साफ़ इरादा जुड़ता चला गया। ये राखियाँ किसी स्टॉल पर बेचने के लिए नहीं थीं, बल्कि लोगों से जुड़ने का एक ज़रिया थीं। इन राखियों को उन्होंने अपनी सोसाइटी के व्हाट्सऐप ग्रुप में साझा किया – सिर्फ़ बाँटने के लिए नहीं, बल्कि बातचीत शुरू करने के लिए।
बात निकलते-निकलते गूंज के आपदा प्रबंधन राहत के काम तक पहुँची। सवाल आए, लोग जुड़े और इस छोटे से प्रयास से ₹660 इकट्ठा हुए। इरादा साफ़ था, कोशिश छोटी थी लेकिन उसके साथ आई समझ और जुड़ाव बहुत बड़ा था।
नूपुर ने उतनी ही राशि अपनी तरफ़ से और जोड़ी और पूरा योगदान गूंज के आपदा प्रबंधन राहत के काम के लिए भेज दिया। इस रक्षाबंधन नूपुर ने सिर्फ़ राखियाँ नहीं बनाईं। उन्होंने यह याद दिलाया कि त्योहार तब और ख़ास हो जाते हैं, जब वे किसी और के काम आ सकें। साथ ही उन्होंने यह संदेश भी दिया कि कोशिश कोई भी कर सकता है, किसी भी तरह से—बस इरादा और भावना कुछ अच्छा करने की हो, तो रास्ते अपने आप निकल आते हैं।

Nupur, a Goonj volunteer, at a Goonj collection camp organized by her.
आप भी इसमें जुड़ सकते है।
हमारा आपसे बस एक ही निवेदन है – शुरुआत कीजिए, वहीं से जहाँ आप हैं। बदलाव के लिए हमेशा बड़ा कदम उठाना ज़रूरी नहीं होता, एक छोटी-सी कोशिश भी बड़ा असर ला सकती है। आप ‘गूंज की गुल्लक’ से शुरुआत कर सकते हैं या टीम 5000 से जुड़ सकते हैं। अगर आप और गहराई से जुड़ना चाहें, तो लंबे समय तक चलने वाली इस बदलाव की प्रक्रिया का हिस्सा भी बन सकते हैं। इसके साथ-साथ आप कलेक्शन ड्राइव आयोजित कर सकते हैं, गूंज के वॉलंटियर बन सकते हैं, इंटर्नशिप कर सकते हैं, या सिर्फ जुड़े रहने के लिए गूंज का मंथली न्यूज़लेटर भी सब्सक्राइब कर सकते हैं।
जुड़ने के कई तरीके हैं, लेकिन फैसला एक ही है – कदम आगे बढ़ाना।
अधिक जानकारी के लिए www.goonj.org को विजिट करें या फिर हमें [email protected] पर लिखें।















