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कहानी एक QR कोड और वालंटियर की

कहानी एक QR कोड और वालंटियर की

कहानी एक QR कोड और वालंटियर की

नीलमोनी गूंज के उन वॉलंटियर्स में से हैं, जिनके अनुभव से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। काम को लेकर उनका जोश और लगन आज भी वैसा ही है। लोगों से बात करने का उनका तरीका बहुत सहज और अपनापन से भरा है। वे गूंज के काम के बारे में ऐसे बताते हैं कि सामने वाला रुककर सुनता है और जुड़ने का मन बना लेता है।

उस दिन नीलमोनी के लगाए गए कलेक्शन कैंप में गूंज की टीम से हिमांशु गए थे। यह उनकी नीलमोनी से पहली मुलाक़ात थी। कैंप अच्छे से चल रहा था, लोग आ रहे थे, बातचीत हो रही थी और पूरे मन से योगदान भी मिल रहा था। यह सब नीलमोनी के अनुभव और लगातार मेहनत का ही नतीजा था।

इस कैंप में एक छोटा-सा बदलाव किया गया था। अब योगदान करने वाले लोगों की एंट्री रजिस्टर में नहीं, बल्कि QR कोड की मदद से ऑनलाइन की जा रही थी। इसकी वजह साफ़ थी, सालों से एक चुनौती रही है कि इतने सारे रजिस्टरों को लंबे समय तक सुरक्षित रख पाना आसान नहीं होता।

हिमांशु कैंप में योगदान कर्ताओं से मिल रहे थे और उनके सवालों के जवाब दे रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि कुछ लोग QR कोड से एंट्री करना नहीं चाह रहे थे। पुराने तरीके, यानी रजिस्टर में एंट्री करना, उन्हें ज़्यादा सहज लग रहा था और यह बिल्कुल स्वाभाविक भी था।

इसी दौरान हिमांशु ने नीलमोनी से बात की और उनसे पूछा कि क्या हम एक एंट्री QR कोड से करके देख सकते हैं। नीलमोनी ने बात को ध्यान से सुना, थोड़ा रुके और फिर हामी भर दी। उन्होंने सिर्फ़ योगदानकर्ता का मोबाइल नंबर डाला।

और यहीं से रजिस्टर एंट्री से QR कोड से एंट्री की शुरुआत हुई।

मोबाइल नंबर डालते ही योगदानकर्ता की पूरी जानकारी स्क्रीन पर सामने आ गई। और साथ ही साथ, फीडबैक के विकल्प और आगे जुड़ाव के रास्ते भी।

 Senior Goonj volunteer Nilmoni interacting with contributors at a collection camp.

Senior Goonj volunteer Nilmoni interacting with contributors at a collection camp.

थोड़ी ही देर में नीलमोनी खुद QR कोड से एंट्री करने लगे। इतना ही नहीं, उन्होंने QR कोड को अपनी सोसाइटी के व्हाट्सऐप ग्रुप में भी साझा किया और साथ में एक सरल लेकिन असरदार मैसेज लिखा—
“अगर आपके पास सामान योगदान करने के लिए नहीं है, तो आप आर्थिक सहायता देकर भी सहयोग कर सकते हैं।”

हिमांशु के लिए यह पल बहुत ख़ास था। इतने सालों के अनुभव के साथ, नीलमोनी का एक नए तरीके को खुले मन से अपनाना सिर्फ़ इसलिए ताकि काम और बेहतर हो सके, यह उनकी सीखने और आगे बढ़ने की भावना को दिखाता है।

यह कैंप हमें यह याद दिलाता है कि असली बदलाव अनुभव और खुलेपन के साथ आता है। और जब अनुभव के साथ नई सोच जुड़ जाए, तो काम और भी मज़बूत हो जाता है।

आप भी इसमें जुड़ सकते है।

हमारा आपसे बस एक ही निवेदन है – शुरुआत कीजिए, वहीं से जहाँ आप हैं। बदलाव के लिए हमेशा बड़ा कदम उठाना ज़रूरी नहीं होता, एक छोटी-सी कोशिश भी बड़ा असर ला सकती है। आप ‘गूंज की गुल्लक’ से शुरुआत कर सकते हैं या टीम 5000 से जुड़ सकते हैं। अगर आप और गहराई से जुड़ना चाहें, तो लंबे समय तक चलने वाली इस बदलाव की प्रक्रिया का हिस्सा भी बन सकते हैं। इसके साथ-साथ आप कलेक्शन ड्राइव आयोजित कर सकते हैं, गूंज के वॉलंटियर बन सकते हैं, इंटर्नशिप कर सकते हैं, या सिर्फ जुड़े रहने के लिए गूंज का मंथली न्यूज़लेटर भी सब्सक्राइब कर सकते हैं।

जुड़ने के कई तरीके हैं, लेकिन फैसला एक ही है – कदम आगे बढ़ाना।

अधिक जानकारी के लिए www.goonj.org को विजिट करें या फिर हमें [email protected] पर लिखें।

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