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जुलाई 2026 | संस्करण 84

हम तैयार हैं.. हमें आपके साथ की भी ज़रूरत है!

देश के कई हिस्सों में मानसून का असर देखने को मिल रहा है। लगातार हो रही बारिश की वजह से कई राज्यों में बाढ़, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाएँ हुई हैं। इससे लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हुआ है, कई जगहों पर ज़रूरी सुविधाएँ भी प्रभावित हुई हैं।

गूंज की फील्ड टीम लगातार स्थानीय लोगों के संपर्क में हैं, ताकि बदलते हालात को समझा जा सके और यह जाना जा सके कि इस समय लोगों को सबसे ज़्यादा किस चीज़ की ज़रूरत है।

राहत से आगे… फिर से शुरुआत की ओर

आपदाएँ लोगों की ज़िंदगी को बुरी तरह प्रभावित करती हैं। लेकिन ऐसे समय में लोगों की हिम्मत, एक-दूसरे का साथ और फिर से आगे बढ़ने की ताकत भी सामने आती है। NDTV चेंजमेकर्स सीज़न 5 की यह फ़िल्म दिखाती है कि गूंज किस तरह सबसे ज़्यादा प्रभावित लोगों की इसी ताकत को पहचानने और सामने लाने का काम करती है। यह फ़िल्म हमें यह भी सोचने का मौका देती है कि हम आपदाओं और उनसे प्रभावित लोगों को किस नज़र से देखते हैं। क्योंकि वे सिर्फ़ मदद पाने वाले लोग नहीं हैं, बल्कि अपने जीवन को फिर से खड़ा करने की शुरुआत भी अक्सर वही सबसे पहले करते हैं।

आगे की राह

SARRD से जुड़ें – SARRD (Societal Alliance for Resilience and Response to Disasters) गूंज की एक पहल है। इसके ज़रिए हम अलग-अलग क्षेत्रों की संस्थाओं, समूहों और लोगों को एक साथ जोड़ रहे हैं, ताकि आपदा के समय मिलकर लोगों तक समय पर और बेहतर सहायता पहुँचाई जा सके। हम चाहते हैं कि ज़्यादा से ज़्यादा लोग और संस्थाएँ इस कोशिश का हिस्सा बनें। जब हम सब साथ मिलकर काम करते हैं, तो ज़रूरत के समय लोगों तक सहायता जल्दी और बेहतर तरीके से पहुँचती है। साथ ही, स्थानीय लोगों की भागीदारी से ऐसे प्रयास और भी मज़बूत होते हैं।

 

अगर आप इस पहल के बारे में और जानना चाहते हैं या इससे जुड़ना चाहते हैं, तो हमें [email protected] पर लिखें।

अपडेट

2026 लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक में गूंज ने SARRD पहल के बारे में अपनी बात रखी

भारत में पिछले 20 से ज़्यादा वर्षों से आपदाओं के दौरान गूंज के ज़मीनी काम से हमें जो सीख मिली है, उसे दुनिया के साथ साझा करने के प्रयास में हमने 2026 लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक के दौरान SARRD (Societal Alliance for Disaster Resilience and Response to Disasters) पर एक चर्चा का आयोजन किया। इस चर्चा में अलग-अलग देशों से सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले लोग, शोधकर्ता, सहयोग देने वाले संगठन और विकास क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल हुए। चर्चा का मुख्य सवाल था – जब कुछ लोग हर साल बाढ़, सूखा, चक्रवात और जलवायु परिवर्तन के दूसरे असर झेलते हैं, तो उनसे सीखकर हम आपदाओं के लिए बेहतर तैयारी कैसे कर सकते हैं?

चर्चा के दौरान एक बात बार-बार सामने आई। अक्सर हम मान लेते हैं कि किसी समस्या का सबसे अच्छा समाधान केवल विशेषज्ञों के पास होता है। लेकिन हकीकत इससे अलग है। जो लोग हर दिन इन मुश्किलों के साथ जीते हैं, उनके पास भी ऐसे अनुभव, समझ और समाधान होते हैं, जिनसे बहुत कुछ सीखा जा सकता है।

आपदाओं, रोज़गार, पानी की कमी और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी अलग-अलग चर्चाओं में सभी ने माना कि ग्लोबल साउथ के देशों के समुदाय केवल इन चुनौतियों का सामना ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने अनुभवों से नए और काम के तरीके भी विकसित कर रहे हैं। ज़रूरत इस बात की है कि दुनिया इन अनुभवों को सुने, इनसे सीखे और इन पर भरोसा करे।

यह चर्चा गूंज और ग्राम स्वाभिमान के संस्थापक अंशु गुप्ता की फोटो प्रदर्शनी ‘Disasters: Myths and Realities’ के साथ हुई। इस प्रदर्शनी में पिछले 20 से ज़्यादा वर्षों के दौरान आपदाओं में किए गए उनके ज़मीनी काम की तस्वीरें दिखाई गईं। इन तस्वीरों ने आपदाओं को देखने का एक अलग नज़रिया सामने रखा। उन्होंने ऐसी कहानियाँ दिखाईं, जो लोगों के सम्मान, मुश्किल समय में भी डटे रहने की हिम्मत और अपने जीवन को फिर से खड़ा करने के उनके अपने प्रयासों को सामने लाती हैं। यह प्रदर्शनी हमें याद दिलाती है कि आपदा से प्रभावित लोग सिर्फ़ सहायता पाने वाले नहीं होते। अपने परिवार, अपने गाँव और अपने जीवन को फिर से खड़ा करने की शुरुआत भी सबसे पहले वही करते हैं।

मासिक धर्म संवाद 2026 की कुछ झलकियाँ

और अधिक जानकारी के लिए, क्लिक करें- LinkedIn की एक पोस्ट

बदलाव की एक कहानी

असम के माजुली द्वीप में हर साल आने वाली बाढ़ बच्चों की पढ़ाई पर असर डालती है। लेकिन मोलुआल मिरी गाँव के लोगों ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि बाढ़ के बावजूद बच्चों की पढ़ाई जारी रहे। गूंज ने इस पहल में एक साथी की भूमिका निभाई। गाँव के लोगों, शिक्षकों और बच्चों ने मिलकर स्थानीय संसाधनों और अपने श्रम से एक पुस्तकालय बनाया। शहरों से मिली उपयोगी सामग्री को भी इस काम में जोड़ा गया। यह सामग्री लोगों की मेहनत और भागीदारी के सम्मान के रूप में दी गई, न कि दान के रूप में। आज यह पुस्तकालय सिर्फ़ किताबों की जगह नहीं है। यह लोगों के साझा प्रयास, भागीदारी और मुश्किल हालात में भी आगे बढ़ते रहने की सोच का प्रतीक बन गया है। यह दिखाता है कि जब लोग मिलकर काम करते हैं, तो अनिश्चित परिस्थितियों के बीच भी उम्मीद और सीखने का सिलसिला जारी रह सकता है।

पूरी कहानी यहाँ पढ़ें।

टीम 5000 से जुड़ें

टीम 5000 गूंज की मासिक आर्थिक सहयोग के लिए एक पहल है। यह ऐसे लोगों का बढ़ता हुआ समूह है, जो एक समान और संवेदनशील समाज बनाने की इस कोशिश में हमारे साथ जुड़ना चाहते हैं। आपका नियमित सहयोग हमें उन जगहों तक ज़रूरत की सामग्री सम्मान के साथ पहुँचाने का काम लगातार जारी रखने में सहयोग करेगा, जहाँ इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।

सामग्री के साथ, आर्थिक सहयोग भी ज़रूरी है।

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