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जून 2026 | संस्करण 83

हम तैयार हैं… हमें आपके साथ की भी ज़रूरत है।

जून की शुरुआत के साथ ही बारिश का मौसम दस्तक दे रहा है। तपती गर्मी से राहत तो मिलेगी, लेकिन देश के कई हिस्सों में बाढ़ और चक्रवात का खतरा भी साथ लेकर आएगी।

पिछले वर्ष हमने बाढ़ और अन्य जलवायु आपदाओं से प्रभावित 19 राज्यों के विभिन्न इलाकों में लोगों के साथ मिलकर काम किया। इस साल भी लाखों लोगों के सामने आजीविका, घर, खेती और रोज़मर्रा की ज़रूरतों से जुड़ी चुनौतियाँ और गहरी हो सकती हैं।

ऐसे समय में समय रहते की गई तैयारी ही सबसे बड़ा सहारा बनती है। तैयारी हमें ज़रूरत पड़ने पर तेज़ी से और बेहतर तरीके से लोगों तक पहुँचने की क्षमता देती है।

इस प्रयास में आपका साथ बहुत मायने रखता है।

आपदाओं के समय सिर्फ राहत पहुँचाना ही नहीं, बल्कि पहले से तैयारी करना और मिलकर खड़े रहना भी उतना ही ज़रूरी है।

इसी सोच के साथ Societal Alliance for Resilience and Response to Disasters (SARRD) के माध्यम से हम विभिन्न संस्थाओं, समूहों और लोगों को एक साथ ला रहे हैं, ताकि आपदाओं के समय अधिक संवेदनशील, सम्मानजनक और समुदाय की भागीदारी पर आधारित प्रयासों को मजबूत किया जा सके।

यदि आप इस पहल के बारे में अधिक जानना चाहते हैं या इससे जुड़ना चाहते हैं, तो हमें [email protected] पर लिखें।

बदलाव की एक कहानी

धुनागुड़ी पाइट गाँव, असम – मानसून के दौरान जुड़े रहने के लिए समुदाय ने बनाया बाँस का पुल

असम के धुनागुड़ी पाइट गाँव में बरसात का मौसम अपने साथ एक बड़ी चुनौती लेकर आता था। बढ़ते जलस्तर और टूटे रास्तों के कारण गाँव का एक हिस्सा बाकी बस्ती से कट जाता था। स्कूल, बाज़ार, स्वास्थ्य सेवाएँ और रोज़मर्रा के कई काम लोगों के लिए मुश्किल हो जाते थे।

गूंज के साथ हुई चर्चाओं के दौरान समुदाय ने अपनी ही समझ, कौशल और स्थानीय संसाधनों के सहारे एक बाँस का पुल बनाने का फैसला किया। यह कहानी दिखाती है कि जब लोग अपनी ज़रूरतों को पहचानकर मिलकर काम करते हैं, तो समाधान भी समुदाय के भीतर से ही निकलते हैं।

पूरी कहानी यहाँ पढ़ें

चौपाल 2026 – देशभर से आए अनुभवों, विचारों और सीखों की कुछ झलकियाँ

चौपाल 2026 में हुई बातचीत, मुलाकातों और साझा सीखों से निकले कुछ अनुभव हम आपके साथ साझा कर रहे हैं। सलोनी मल्होत्रा, निरंजना वेंकटरकृष्णन और विजया कावेरी के ये विचार उन अनेक आवाज़ों में से कुछ हैं, जिन्होंने इस मिलन को समृद्ध बनाया।

इन अनुभवों में संवाद, सीख और मिलकर बदलाव की दिशा में काम करने की वह भावना झलकती है, जो चौपाल की पहचान रही है।

टीम 5000 से जुड़ें…

टीम 5000 उन लोगों का समूह है, जो एक अधिक संवेदनशील, बराबरी वाले और मानवीय समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं। आपका जुड़ना सिर्फ सहयोग नहीं, बल्कि उस सोच का हिस्सा बनना है जो मानती है कि बदलाव बड़े संसाधनों से नहीं, लोगों की साझी प्रतिबद्धता और छोटे-छोटे प्रयासों से आता है।

सामग्री के साथ-साथ आर्थिक सहयोग भी इस प्रयास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मई महीने में, अंतरराष्ट्रीय मासिक धर्म स्वच्छता दिवस (28 मई) के अवसर पर,  हमने कहानियों की एक श्रृंखला साझा की। यह श्रृंखला मासिक धर्म के मुद्दे पर गूंज के 4A फ़्रेमवर्क—पहुँच, किफ़ायतीपन, जागरूकता और कार्रवाई—के तहत महिलाओं और मासिक धर्म का अनुभव करने वाले अन्य लोगों के साथ पिछले दो दशकों से अधिक समय से किए गए हमारे काम से मिली सीखों और अनुभवों पर आधारित है।

हमारा अनुभव बताता है कि मासिक धर्म का संबंध सिर्फ स्वास्थ्य से नहीं है। यह शिक्षा, गरिमा, आवाजाही, पानी, स्वच्छता और समान अवसरों जैसे कई मुद्दों से जुड़ा है। खासकर उन लोगों के लिए, जो गरीबी, आपदाओं या सामाजिक भेदभाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

इन्हीं मुद्दों पर बातचीत और समझ को आगे बढ़ाने के लिए हम आपको Menstruation Dialogue 2026 में आमंत्रित करते हैं। यह एक ऐसा मंच है, जहाँ विभिन्न क्षेत्रों के लोग मिलकर एक ऐसे विषय पर बात करते हैं, जिसके बारे में आज भी खुलकर बात करना आसान नहीं है।

विषय: जीवन के अनुभवों, शोध, नीतियों और सामूहिक प्रयासों को केंद्र में लाना

📅 1 जुलाई 2026
🕘 सुबह 9:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक

ज़रूर सुनें: सहयोग, विकास और गरिमा को लेकर एक महत्वपूर्ण बातचीत

अंशु गुप्ता के साथ एक गहन संवाद

यदि आपका जुड़ाव नेतृत्व, विकास, शिक्षा या सतत विकास के क्षेत्र से है, तो TALRadio का यह एपिसोड आपके लिए विशेष रुचि का हो सकता है।

इस संवाद में गूंज और ग्राम स्वाभिमान के संस्थापक तथा रैमॉन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित अंशु गुप्ता उस सवाल को साझा करते हैं, जिसने गूंज की शुरुआत के समय उन्हें परेशान किया था। वे बताते हैं कि कैसे समय के साथ उसी सवाल ने गूंज की सोच, उसके मूल सिद्धांतों और काम करने के तरीके को आकार दिया।

यह बातचीत विकास, लोगों की भागीदारी, संसाधनों की भूमिका और गरिमा को देखने-समझने का एक अलग नज़रिया प्रस्तुत करती है।

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