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अगस्त 2026 | संस्करण 87

“असम के शिवसागर और जोरहाट की मेरी हाल की यात्रा की कुछ तस्वीरें। इस साल असम, बिहार, ओडिशा, कश्मीर, केरल और कई अन्य राज्यों में बाढ़ की स्थिति बहुत गंभीर है… अब हम सभी के लिए लोगों के साथ खड़े होने का समय है। ‘गूंज’ ज़मीनी स्तर पर काम कर रही है, साथ ही कई सरकारी और गैर-लाभकारी संस्थाएं भी जुटी हैं, और सबसे अहम बात यह है कि हज़ारों आम नागरिक भी सहायता कर रहे हैं… आप किसी के भी साथ मिलकर काम करें, लेकिन काम ज़रूर करें…”

– अंशु गुप्ता (संस्थापक – गूंज एवं ग्राम स्वाभिमान)

“और फिर आती हैं यहाँ की महिलाएँ… जिन परिवारों ने लगभग सब कुछ खो दिया है, वे भी हमें एक कप चाय, पीने का पानी या घर पर बना नींबू-पानी पिलाने की ज़िद करती हैं। इतना बड़ा नुकसान झेलने के बावजूद, वे अजनबियों के प्रति अपनापन बनाए रखती हैं। मेरे लिए, यही मुश्किल हालात में भी हिम्मत बनाए रखने का असली मतलब है। बाढ़ उनके घर, सामान और रोज़ी-रोटी भले ही बहा ले गई हो, लेकिन वह उनकी इंसानियत को नहीं बहा सकी।”

– प्रतीक कोंथौजम (टीम गूंज, असम)

असम, बिहार, जम्मू और कश्मीर, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा की फिल्ड से कुछ तस्वीरें।

ज़रूरी सामान जो पहुँचाया गया: अब तक 27 ज़िलों में 21,000 से ज़्यादा सामान की किट पहुँचाई जा चुकी है। इन किट में सूखा राशन, तिरपाल, बर्तन, चादरें, तौलिए, जूते-चप्पल, सैनिटरी नैपकिन, अंडरगारमेंट्स, साड़ियाँ, गूंज के अपसाइकल किए गए बैग, कपड़े की रस्सी, दरी, सुजनी और आसन जैसी ज़रूरी चीज़ें शामिल हैं।

हम तैयार हैं… हमें आपके साथ की भी ज़रूरत है!

तत्काल आवश्यक सामग्री:

  • सूखा राशन — चावल, दालें, मसाले, चीनी, चायपत्ती, मिल्क पाउडर, खाना पकाने का तेल (सीलबंद पैकेट में), बिस्कुट, स्नैक्स और तुरंत खाया जा सकने वाला खाना।
  • रोज़मर्रा की दवाइयाँ, टॉयलेटरीज़, सैनिटरी पैड, क्लोरीन की गोलियाँ, ब्लीचिंग पाउडर।
  • तिरपाल, कंबल, मच्छरदानी
  • पहनने के कपड़े (सभी उम्र के लोगों के लिए), नए अंडरगारमेंट्स, चप्पल
  • बर्तन, छाते, रेनकोट
  • टॉर्च, बैटरी, सोलर लाइट
  • स्कूल सामग्री और खिलौने।
  1. आप अपना सामान अपने नजदीकी गूंज ऑफिस और ड्रॉपपिंग सेंटर पर भेज सकते हैं।
  2. ट्रांसपोर्टेशन, लॉजिस्टिक्स और ज़रूरी सामान खरीदने के लिए आर्थिक योगदान भी उतना ही ज़रूरी है। यहाँ योगदान करें


    अपने सहयोग को और आगे बढ़ाएँ 
  • अपने समुदाय, ऑफिस या स्कूल में गूंज का कलेक्शन कैंप आयोजित करें।
  • अपनी संस्था के माध्यम से सहयोग दें।
  • अपनी संस्था में पेरोल गिविंग शुरू करें, ताकि कर्मचारी भी प्रभावित परिवारों और समुदायों के साथ खड़े होकर अपना सहयोग दे सकें।
  • अगर आप एक माइक्रो-साइट शुरू करना चाहते हैं, तो हमें [email protected] पर लिखें या यहां योगदान करें

ज़मीनी कहानियाँ

ओडिशा और असम की ये कहानियाँ हमें बताती हैं कि मुश्किल समय से उबरने की ताकत मिलकर काम करने से आती है। यहाँ के लोग अपनी मेहनत, अनुभव और जानकारी के साथ इस मुश्किल समय से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं। आप भी अपने पास मौजूद सामान, आर्थिक सहयोग, अपनी क्षमता, समय और संपर्कों के जरिए उनके साथ खड़े हो सकते हैं। मिलकर किया गया यह प्रयास लोगों को एक मजबूत और सम्मानजनक भविष्य की ओर ले जा सकता है।

कुलचड़ा, ओडिशा: गाँव की नहर करीब 15 साल से झाड़ियों और गाद से भरी हुई थी। इसकी वजह से बारिश और ज्वार के समय पानी खेतों और घरों की तरफ भर जाता था। खेतों में पानी जमा रहने से खेती करना भी मुश्किल हो गया था। गूंज की ‘क्लॉथ फॉर वर्क’ पहल के तहत गाँव के लोगों ने मिलकर नहर की सफाई की और पानी की निकासी का रास्ता फिर से खोल दिया। इससे नहर में पानी का बहाव शुरू हुआ और खेतों में दोबारा खेती करना आसान हो गया। गाँव के लोगों की इस एकजुट कोशिश ने आसपास के गाँवों के लोगों को भी अपने स्तर पर ऐसे काम करने के लिए आगे आने की प्रेरणा दी।

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प्रसादचक, पश्चिम बंगाल: मौसमी बाढ़ के कारण शिलाबती नदी के उस पार रहने वाले लोगों के लिए स्कूल, बाजार और अस्पताल तक पहुँचना मुश्किल हो जाता था। गूंज की ‘क्लॉथ फॉर वर्क पहल’ के तहत गाँव के लोगों ने मिलकर स्थानीय संसाधन और अपनी मेहनत से बाँस का एक पुल बनाया। इससे एक ज़रूरी संपर्क फिर से बहाल हो गया और रोज़मर्रा का आना जाना आसान हो गया।

पूरी कहानी यहाँ पढ़ें

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