
फ़रवरी 2026 | संस्करण #79
कुछ खास होने जा रहा है — उसके लिए समय ज़रूर निकालिएगा। 🙂

चौपाल 2026: हमारी सालाना नो एजेंडा वाली मुलाक़ात।
जब इरादा सिर्फ साथ आने और अपने इस साझा सफ़र का जश्न मनाने का हो, तो आपकी मौजूदगी के बिना यह अधूरा रह जाएगा।.
आइए, इस रविवार दिल से जुड़े और हमारे साथ शामिल हों।..
हम 18 फ़रवरी को कपड़ा दिवस के रूप में मनाते हैं — कपड़े की अनगिनत संभावनाओं का उत्सव मनाने के लिए। गूंज की शुरुआत आज ही के दिन 27 साल पहले हुई थी इसका उद्देश्य कपड़े जैसे साधारण दिखने वाले लेकिन बुनियादी और अक्सर नज़रअंदाज़ की जाने वाली ज़रूरत की ओर ध्यान दिलाना था।
पिछले दो दशकों से अधिक की इस यात्रा ने हमें कपड़े को एक नए नज़रिए से समझना सिखाया है कपड़ा सिर्फ़ तन ढकने की चीज़ नहीं, बल्कि सम्मान है, ज़रूरत है, रोज़गार है और उससे कहीं ज़्यादा है। इसी समझ के साथ हमने अपने स्थापना दिवस को “कपड़ा दिवस” के रूप में मनाने का फैसला लिया, ताकि लोग कपड़े को केवल ‘पुराना सामान’ न समझें, बल्कि उसे एक जिम्मेदारी और संभावना के रूप में देखें।
इस पहल की शुरुआत भले ही गूंज ने की है, लेकिन यह दिन सिर्फ गूंज का नहीं है। क्योंकि कपड़ा सबका है।
जब ‘बेकार’ समझा जाने वाला कपड़ा, इंसानियत के लिए संभावना बन जाता है

भारत में कपड़ा कभी भी सिर्फ एक वस्तु नहीं रहा। खादी से लेकर रोज़मर्रा की ज़िंदगी तक, कपड़ा आत्मनिर्भरता, सम्मान और अपनापन का प्रतीक रहा है।
इस कपड़ा दिवस पर प्रस्तुत यह विस्तृत लेख हमें आमंत्रित करता है कि हम कपड़े को ‘बेकार’ नहीं, बल्कि एक सशक्त सामाजिक और जलवायु संसाधन के रूप में समझें।
आगामी कार्यक्रम

परोपकार का एक नया युग – पावर स्ट्रक्चर से लेकर जीवित इकोसिस्टम तक
हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि रिसोर्स अलायंस ने आने वाले सत्र के लिए मुख्य वक्ता के तौर पर गूंज और ग्राम स्वाभिमान के संस्थापक – अंशु गुप्ता को आमंत्रित किया है।
बदलाव लाने के लिए स्पष्ट विचार और ठोस प्रस्तावों की घोषणा से शुरू हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाते हुए, इस सत्र में वे कुछ महत्वपूर्ण सवालों पर बात करेंगे। जैसे असल में ‘पूंजी’ किसे कहा जाए? किसका ज्ञान सिस्टम को आकार देता है, और कैसे भरोसा, रिश्ते और समुदाय, संसाधन अच्छे बदलाव की नींव बन सकते हैं।
तारीख: गुरुवार, 26 फ़रवरी
समय: 08:00 EST | 13:00 GMT | 14:00 CET | 15:00 CAT | 18:30 IST
हाल ही में आयोजित एक सम्मेलन
इंडिया फंडरेज़िंग सम्मेलन का आयोजन दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में किया गया, जहाँ विभिन्न संगठनों को एक मंच पर लाया गया। इस दौरान भरोसा बनाने, वैश्विक साझेदारियाँ विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संसाधन जुटाने के संभावित रास्तों पर विस्तार से चर्चा हुई। हमारे संस्थापक अंशु गुप्ता भी इस बातचीत में वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने उद्देश्य आधारित संसाधन जुटाने की आवश्यकता और उसके महत्व पर अपने विचार साझा किए।

































