
जनवरी 2026 | संस्करण #78

आपदाएँ लोगों की ज़िंदगी को कठिन परीक्षा में डाल देती हैं और कई बार बहुत नुकसान भी पहुँचाती हैं। लेकिन इन मुश्किल हालातों में लोगों की हिम्मत, जज़्बा और मजबूती भी सामने आती है। NDTV Changemakers Season 5 की यह फ़िल्म दिखाती है कि किस तरह गूंज का काम, आपदाओं से सबसे ज़्यादा प्रभावित लोगों के भीतर छिपी इस ताक़त को उभारकर सामने लाता है। साथ ही, यह फ़िल्म हमें यह सोचने के लिए भी प्रेरित करती है कि हम आपदाओं को और उनसे प्रभावित लोगों को किस नज़र से देखते हैं, और क्या उस नज़रिए को बदलने की ज़रूरत है।
क्या सच में हमारे पास अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए संसाधनों की कमी है? या फिर सवाल यह है कि क्या हम पहले से मौजूद चीज़ों की क़द्र करना भूल गए हैं? गूंज की 2024–25 की वार्षिक रिपोर्ट यही दिखाती है कि जब हम अपने पास मौजूद संसाधनों को महत्व देते हैं, तो क्या-क्या संभव हो सकता है। असल कमी चीज़ों की नहीं है — कमी इस बात की है कि हम लोगों, संसाधन, ज्ञान और किए गए प्रयासों को किस नज़र से देखते हैं। जब इंसान की गरिमा सबसे पहले रखी जाती है, तो राहत सिर्फ़ तात्कालिक सहायता नहीं रह जाती, बल्कि वह लंबे समय की मज़बूती में बदल जाती है। और जो अतिरिक्त सामग्री होती है, वह सिर्फ़ योगदान नहीं रह जाती — वह स्थायी बदलाव का एक सशक्त ज़रिया बन जाती है।
चौपाल मुंबई 2026 – बिना एजेंडा की बातचीत – मुंबई, सपनों का शहर, जो सपने दिखाता है, उन्हें पूरा करता है और भरोसा बनाए रखता है। आइए इस खास (सालाना) बातचीत का हिस्सा बनें, जहाँ कुछ अच्छा करने का इरादा रखने वाले साथी (Do-Gooders) एक साथ आते हैं — इंसानियत के लिए साझा सोच और जिम्मेदारी के साथ। यहाँ साथ मिलकर कुछ करने को लेकर बातचीत होती है, उन लोगों के साथ जो सच में परवाह करते हैं। आप सादर आमंत्रित हैं।

कपड़ा, वस्त्र, Cloth — अगर आपका इस्तेमाल किया हुआ कपड़ा सिर्फ़ पहनने भर से ज़्यादा कुछ कर सके, तो? इस कपड़ा दिवस, 18 फ़रवरी, हम कपड़े को सिर्फ़ एक बुनियादी ज़रूरत के रूप में नहीं, बल्कि गरिमा, रोज़गार और स्थायी बदलाव के एक सशक्त ज़रिये के रूप में देखते हैं। गूंज ने अपने स्थापना दिवस को इसी सोच के साथ समर्पित किया है — ताकि हर कोई यह दोबारा सोचे कि उसका कपड़ा दुनिया में कितना कुछ मायने रख सकता है और कितना कुछ बदल सकता है।