
दिसंबर 2025 | #77 (हिंदी प्रकाशन)
ठंड लोगों को नहीं मारती, कपड़ों की कमी मारती है।
दिसंबर आ गया है और सर्दियों के साथ मौसम से जुड़ी मुश्किलें एक बार फिर सामने हैं। ‘ओढ़ा दो ज़िंदगी’ गूंज का सर्दियों में चलने वाला सालाना अभियान है, जिसमें सभी लोग मिलकर एक-दूसरे का साथ देते हैं। आपके द्वारा दिए गए ऊनी कपड़े और ज़रूरी सामान लोगों को सर्दी से राहत देने के साथ-साथ उन्हें सम्मान के साथ अपनी ज़िंदगी फिर से आगे बढ़ाने में सहायता करते हैं।
साल 2025 में उत्तराखंड, उत्तर-पूर्वी राज्यों, पंजाब और देश के कई अन्य हिस्सों में बाढ़, भूस्खलन और अन्य आपदाओं से घरों, फसलों और रोज़गार पर असर पड़ा है। सर्दी बढ़ने के साथ इन हालात में रहने वाले लोगों की चुनौतियाँ और बढ़ जाती हैं। ऐसे समय में समय पर सहयोग बहुत अहम होता है।
अब आप गूंज वार्षिक रिपोर्ट 2024–25 पढ़ सकते है।
गूंज की 2024–25 की वार्षिक रिपोर्ट के केंद्र में एक अहम सवाल है, जो आज के समय को समझने में सहायता करता है: बदलते मौसम, चीज़ों की भरमार और बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच हम मिलकर समाज को फिर से कैसे मजबूत बना सकते हैं?
यह रिपोर्ट दिखाती है कि जब लोग सिर्फ देखने वाले नहीं, बल्कि भागीदार बनते हैं, और साथ काम करते हैं, तो सामान का सही इस्तेमाल करके और समुदाय की अगुवाई में एक ऐसा भविष्य बनाया जा सकता है, जहाँ सबकी ज़िंदगी सम्मान के साथ आगे बढ़े।
हम उन लोगों की सराहना कर रहे हैं जो जुनून के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव लाते हैं।
जुनून अवॉर्ड्स, जिसका नाम हिंदी शब्द “जुनून” से लिया गया है, विकास के काम के पीछे मौजूद जज़्बे और दिल से किए गए प्रयासों का सम्मान करते हैं। ये अवॉर्ड उन संगठनों को सम्मानित करता हैं, जो नई सोच, प्रभावशाली काम और समुदाय की भागीदारी से तैयार किए गए समाधानों के ज़रिए जलवायु परिवर्तन से लड़ने में अग्रसर हैं।
EarthON Foundation का दिल से धन्यवाद, जिन्होंने विजेताओं को आर्थिक सहायता देकर उनकी हौसला-अफ़ज़ाई की। और The Logical Indian का भी आभार, जिन्होंने इस तरह की कहानियों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचा कर उन्हे प्रेरित करने में सहायता दी ।
चार बेहतरीन संगठनों को निम्नलिखित श्रेणियों में सम्मानित किया गया है —
- नए जलवायु समाधान – Roundglass Foundation
- हरित भविष्य के लिए पुनर्चक्रण – Nav Bharat Jagriti Kendra और Realm of Nature-Based Actions
- जलवायु कार्रवाई में नागरिक भागीदारी – Snow Leopard Conservancy India Trust
बीते कुछ दिनों में हुई गतिविधियों का अपडेट।
विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन, देहरादून | 28–30 नवम्बर



गूंज ने वर्ष 2025 में आयोजित विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन, (WSDM) में भाग लिया। इस अवसर पर हमने ‘आपदाएँ: मिथक और वास्तविकताएँ’ विषय पर एक अनुभवात्मक प्रदर्शनी प्रस्तुत की। यह प्रदर्शनी अंशु गुप्ता जी (संस्थापक – गूंज और ग्राम स्वाभिमान) द्वारा ली गई तस्वीरों पर आधारित थी, जिनमें भारत में पिछले तीन दशकों में आई आपदाओं को सशक्त रूप से दिखाया गया है।
इसके साथ ही, हमने ने दो पैनल चर्चाओं का आयोजन भी किया। पहली चर्चा इस बात पर केंद्रित थी कि कई पक्षों के साथ मिलकर, लोगों को केंद्र में रखते हुए आपदा के समय कैसी प्रतिक्रिया बनाई जा सकती है। दूसरी चर्चा में आपदा प्रबंधन में समुदाय की भूमिका, उनकी आवाज़ और उनकी मजबूती पर बात की गई, जिन पर अक्सर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।
इन संवादों और चर्चाओं में भाग लेने, हमें प्रोत्साहित करने और अपने विचार साझा करने वाले सभी अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े प्रतिभागियों के प्रति हम हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं।
मैत्री – नेशनल वॉलंटियर्स’ मीट | 22–23 नवंबर

मैत्री हमारा वार्षिक नेशनल वॉलंटियर्स मीट है — यह एक ऐसा मंच है जहाँ अपने समय और ऊर्जा से काम में योगदान देने वाले लोग एक साथ आते हैं, अनुभव साझा करते हैं और आगे की योजनाएँ मिलकर बनाते हैं। इस साल, महाराष्ट्र, दिल्ली और उत्तराखंड के 25 से अधिक वॉलंटियर्स मुंबई में हमारे साथ जुड़े। पालघर फील्ड विजिट ने दिखाया कि समुदाय अपने तरीके से कैसे काम कर सकता है और साथ ही सम्मान और दूसरों के प्रति समझ की अहमियत को दोबारा रेखांकित किया। दो दिन में यह साफ़ हो गया कि वॉलंटियरिंग का मतलब है – साझा जिम्मेदारी, और गूंज न केवल एक संगठन के रूप में, बल्कि एक विचार के रूप में भी विकसित हो रहा है।
जमीनी कहानियां
बिहार के जमुई जिले के टोला धनुकतारी गाँव में, मानसून की बारिश ने मुख्य सड़क को तोड़ दिया था। लोगों ने अपने साधन और समझदारी से सड़क की मरम्मत की, ताकि सर्दियों में मुश्किलें और बढ़ने से पहले रास्ता सुरक्षित हो जाए।
मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के अमडी गाँव में, लोगों ने श्रमदान के ज़रिए एक लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो रहे कुएँ को ठीक किया। यह काम सर्दी से ठीक पहले हुआ, जिससे लोगों की रोज़मर्रा की परेशानियाँ कम हुईं और उम्मीद फिर से जगी।



















