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Sochta hoon..

Sochta hoon..

Sochta hoon..

सुनो..
तुम, अब गांव में ही बस जाना..
दो सूखी रोटी खाना..
पर वापस ना आना !!
हम, तुम्हें दीन-हीन,
ग़रीब, बेचारा कहते हैं ना..
खुद घरों में घुसकर,
तुम्हे सड़कों पर भूखा, पैदल छोड़ते हैं ना..
बस तुम वापस न आना !!
यकीन मानना..
यह सारे शब्द बदलेंगे..
बेचारा कौन है, हम यकीनन समझेंगे !!